Showing posts with label राजस्थानी साहित्य. Show all posts
Showing posts with label राजस्थानी साहित्य. Show all posts

Tuesday, 6 August 2013

राजस्थानी साहित्य / Literature of Rajasthan





Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.

राजस्थान के साहित्य से संबंधित विविध तथ्य / Trivia of Literature of Rajasthan


  • चर्चरी, ढाल, चोडालिया, छःडालिया, पावडा, मंगल, धवल, बावनी, कुलक, हीयाली, रेलुका व संझाय इत्यादि - राजस्थानी पद्य साहित्य की विविध विधाएं (शैलियां)
  • जयसिंह चरित्र - पुंडरिक रत्नाकर
  • नाथ चरित्र, जलंधर चरित्र व नाथ पुराण - जोधपुर महाराजा मानसिंह
  • जोधपुर महाराजा जसवंतसिंह की दो प्रसिद्ध रचनाएं - भाषा भूषण (अलंकार ग्रंथ) व प्रबोध चंद्रोदय नामक नाटक
  • प्रतापचरित्र, दुर्गादास चरित्र व रूठी रानी - केसरीसिंह बारहठ
  • हाला झाला री कुंडलियां - ईसरदास बारहठ
  • हम्मीर मदमर्दन - जयसिंह सूरी
  • ज्ञान समुंद्र - संत सुंदरदास
  • राणा कुंभा की प्रसिद्ध संगीत विषयक कृतियां - रसिक प्रिया,संगीत राज व संगीत मीमांसा
  • अजमेर के चैहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) का प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक - हरिकेलि
  • ए प्रिंसेस रिमेंबर्स - महारानी गायत्रीदेवी
  • ए डिस्क्रेप्टिव केटलाॅग आॅफ दी बार्डिक एंड हिस्टोरिकल क्रोनिकल्स - एल.पी. तेस्तितोरी
  • राजपूताने का इतिहास - पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
  • मेवाड़ दिग्दर्शन - बलवंतसिंह मेहता
  • राजस्थान के लोकानुरंजक - देवीलाल सामर
  • मेवाड़ प्रजामंडल - मोहनलाल सुखाडि़या
  • प्रत्यक्ष जीवनशास्त्र - हीरालाल शास्त्री
  • बोलो माधवी - चंद्रप्रकाश देवल
  • उसने कहा था - चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • वर्ष 1954 में प्रकाशित राजस्थानी व्याकरण के लेखक - सीताराम लालस
  • राजप्रशस्ति महाकाव्य - रणछोड़दास भट्ट
  • पदमनाभ द्वारा रचित दो प्रसिद्ध कृतियां - कान्हड़दे प्रबंध व हमीरायण
  • एकमात्र ऐसा प्रमुख रासौ ग्रंथ जो डिंगल भाषा में रचित है - गिरधर आसिया का सगत रासौ
  • एकमात्र ऐसा प्रमुख रासौ ग्रंथ जो राजस्थान के ब्राह्मण साहित्य का प्रमुख अंग/ग्रंथ है - नरपति नाल्ह का बीसलदेव रासो
  • राजस्थानी साहित्य में ब्राह्मण साहित्य के दो प्रमुख ग्रंथ - बीसलदेव रासौ व कान्हड़दे प्रबंध
  • राजस्थानी साहित्य की कौनसी प्राचीन विद्या गद्य-पद्य तुकांत रचना होती है - वचनिका
  • राजस्थानी साहित्य की गद्य विधाएं - ख्यात, वात, विगत, विगत, वंशावली, हाल, हकीकत, दवावैत
  • राजस्थानी साहित्य की पद्य विधाएं - रासौ, वेलि, निसाणी, वचनिका
  • राजस्थानी भाषा में गद्य में लिखा गया सबसे प्रसिद्ध साहित्य है - ख्यात
  • मुहणौत नैणसी मारवाड़ के जसवंतसिंह प्रथम के दरबारी व दीवान थे।
  • महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण का जन्म बूंदी जिले में हुआ था।
  • राजस्थानी भाषा शब्दकोश के जनक है - सीताराम लालस
  • केसरीसिंह बारहठ द्वारा प्रसिद्ध क्रांतिकारी रचना ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ किस शासक के द्वारा लिखी गई थी - मेवाड़ महाराणा फतेहसिंह
  • 19वीं शताब्दी में राजस्थान में राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत लेखन का प्रारंभ किससे माना जाता है/आधुनिक राजस्थानी काव्य के नवजागरण के पुरोधा कवि है - सूर्यमल मिश्रण
  • पृथ्वीराज राठौड़ किस नाम से साहित्य रचना करते थे - पीथल
  • वेलि क्रिसन रूक्मणी के रचयिता - पृथ्वीराज राठौड़
  • वेलि क्रिसन रूक्मणी री टीकाकार - जैतदान
  • सूर्य मल मिश्रण बूंदी शासक महाराव रामसिंह हाडा के दरबारी थे।
  • वीर विनोद के रचयिता कविराज श्यामलदास मेवाड़ महाराणा सज्जनसिंह (शंभूसिंह) के दरबारी थे।
  • राजस्थान थ्रू द एजेज के लेखक - नाथूराम खड़गावत (राजस्थान में 1857 की क्रांति का व्यापक अध्ययनकर्ता)
  • राजस्थान के किस प्रसिद्ध साहित्यकार व इतिहासकार को ब्रिटिश सरकार द्वारा केसर-ए-हिंद की उपाधि से सम्मानित किया गया - महामहोपाध्याय कविराज श्यामलदास
  • कवि बिहारी मिर्जा राजा जयसिंह के दरबारी थे।
  • राजस्थान में डाॅ. तेस्तितोरी का संबंध किस क्षेत्र से था - चारण साहित्य
  • अजमेर हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रेप्टिव तथा हिंदु सुपीरियरिटी आदि प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक थे - अजमेर के राय बहादुर हरविलास शारदा
  • जब महाराणा प्रताप ने भावावेश में आकर अकबर के समक्ष आत्मसमर्पण हेतु पत्र लिखना चाहा तो किस कवि ने उनमें आत्मविश्वास पैदा कर ऐसा करने से रोका था - पृथ्वीराज राठौड़
  • राजस्थानी भाषा में रामायण के रचयिता - संत हनवंत किंकर
  • चारणी गद्य साहित्य (डिंगल साहित्य) के दो सबसे महान साहित्यकार (इतिहासकार) - बांकीदास व दयालदास
  • कह दो आ डंके री चोट, मारवाड़ नहीं रह सी ओट कविता के रचयिता - जयनारायण व्यास
  • ढोला मारू रा दूहा राजस्थानी लोक साहित्य की कौनसी विधा है - लोक काव्य
  • डिंगल का हैरोस - पृथ्वीराज राठौड़
  • इला न देणी आपणी, हालरियो हुलराय; पूत सिखावै पालणै, मरण बड़ाई माया प्रस्तुत दोहा पंक्ति किस प्रसिद्ध रचना की है - सूर्यमल्ल मिश्रण की वीर सतसई
  • 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में राजस्थान में इतिहास लेखन का प्रारंभ किससे माना जाता है - कर्नल जेम्स टॉड 
  • 20 वीं सदी में राजस्थान के इतिहास लेखन की परंपरा आरंभ करने वाले राजस्थानी इतिहासकार - पं. गौरी शंकर हीराचंद ओझा
  • राजस्थानी गद्य साहित्य के अमर लेखक बांकीदास की ऐतिहासिक बातों का संग्रह - सिंढायच
  • मुंडियार री ख्यात को राठौड़ा री ख्यात भी कहा जाता है जिसके लेखक है - दयालदास
  • 8 वीं शताब्दी में संस्कृत भाषा में रचित शिशुपाल वधम नामक महाकाव्य के रचयिता महाकवि माघ राजस्थान की विभूति है जो भीनमाल के निवासी थे।
  • कान्हड़दे प्रबंध के रचयिता महाकवि पदमनाभ जालोर के शासक अखेराज सेानगरा के दरबारी थे।
  • राजस्थानी साहित्य के अमर लेखक बांकीदास मारवाड़ध्जोधपुर महाराजा मानसिंह के व दयालदास बीकानेर महाराज रतनसिंह के दरबारी थे।
  • विधवा जीवन पर लिखी गई रचना हूं गौरी किण पीव री के लेखक है - यादवेंद्र शर्मा चंद्र
  • हिंदी में सर्वप्रथम भारतीय लिपी का शास्त्र लेखन करने वाले राजस्थान के सुप्रसिद्ध इतिहासकार - पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
  • विजयदान देथा द्वारा रचित बाता री फुलवारी की प्रमुख विशेषता है - राजस्थानी लोककथाओं का संग्रह
  • किस ग्रंथ के 5वां वेद व 19वां पुराण कहा गया है - पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित वेलि क्रिसन रूक्मणी री को
  • करौली के यदुवंशी शासकों का वर्णन करने वाला रासौ ग्रंथ - नल्लसिंह भट्ट का विजयपाल रासौ
  • रणथंभौर के राव हमीर की विजयों का विस्तृत विवरण देनों वाला ग्रंथ है - हमीर महाकाव्य
  • सुमेल युद्ध का वर्णन करने वाली ख्यात जोधपुर की ख्यात है जिसके लेखक थे - मुरारीदान
  • राजस्थान के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध रचना व सबसे महत्वपूर्ण कृति हैध् सबसे प्रथम रचना - कर्नल जेम्स टॉड की "एनल्स एंड एंटीक्विटीज आफ राजस्थान" (2 खंडों में)
  • कर्नल जेम्स टॉड  की प्रसिद्ध कृति एनल्स का प्रथम खंड 1829 में व द्वितीय खंड संन 1832 में प्रकाशित हुआ। एनल्स के प्रथम खंड में राजपूताने की भौगोलिक स्थिति राजपूतों की वंशावली व मेवाड़ रियासत का इतिहास है।
  • विग्रहराज चतुर्थ द्वारा रचित हरिकेल नाटक के कुछ अंश ढाई दिन का झौंपड़ा नामक मस्जिद की दीवारों पर उत्कीर्ण है।
  • आयो इंगरेज मुलक रै उपर काव्य रचना के लेखक थे - बांकिदास
  • गुलिस्तांरू शेखसादी द्वारा लिखे गये इस ग्रंथ को अलवर महाराजा विजयसिंह ने जवाहरातों की स्याही से लिखवाया था।
  • राजस्थान का गजेटियर - मारवाड़ रा परगना री विगत
  • जोधपुर का गजेटियर - नैणसी री ख्यात
  • राजस्थान के जैसलमेर जिले में प्रचलित लोकवार्ता (प्रेमाख्यान) है - मूमल
  • राजस्थान का कौनसा प्रसिद्ध ऐेतिहासिक ख्यात अधूरा है - नैणसी की ख्यात
  • कलीला-दमना - मेवाड़ शैली की कहानी के दो पात्र
  • राजस्थान की कौनसी जाति विभिन्न जातियों के वंशक्रम को अपनी बहियों में सुरक्षित रखती है - भाट
  • राजस्थानी लोक साहित्य में किस जाति का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है - चारण
  • राजस्थानी भाषा साहित्य में पवाड़ा - वीरों के विशेष कार्यों का वर्णन करने वाली रचना अर्थात लोक गाथाएं
  • राजस्थानी संस्कृति का गढ है - राजस्थानी साहित्य 
  • राजस्थान के महान कवि, इतिहासकार व साहित्यकार चंदबरदाई का वास्तविक नाम था - पृथ्वीभट्ट
  • राजस्थान का सर्वाधिक प्रसिद्ध लोक काव्य - ढोला मारू रा दूहा
  • राजस्थानी भाषा की सबसे पहलीध्सबसे प्राचीन रचना - वज्रसेन सूरी की भरतेश्वर बाहुबलि घोर
  • संवतोल्लेख वाली प्रथम राजस्थानी रचना पहली तिथियुक्त राजस्थान रचना - शालिभद्र सूरि की भरतेश्वर बाहुबलि रास
  • वचनिका शैली की प्रथम सशक्त रचनाध्सबसे प्राचीन वचनिकाध्चारण शैली की प्रथम रचना किसे माना जाता है - शिवदास गाडण द्वारा रचित अचलदास खींची री वचनिका 
  • ख्यात शैली की प्रथम रचनाध्सबसे प्राचीन ख्यात - मुहणौत नैणसी री ख्यात
  • राजस्थानी भाषा का प्रथम उपन्यास - शिवचंद भरातिया का कनक सुंदर
  • आधुनिक राजस्थानी भाषा की प्रथम की काव्य कृति - चंद्रसिंह बिरकाली द्वारा रचित बादली
  • राजस्थान में पाया जाने वाला सबसे प्राचीन साहित्य - ब्राह्मण साहित्य
  • राजस्थान का प्रथम हिंदी गद्य निर्माता, प्रथम हिंदी उपन्यासकार व प्रथम पत्रकार - बूंदी के मेहता लज्जाराम शर्मा
  • राजस्थानी भाषा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण व सर्वाधिक विशिष्ट साहित्य - चारण साहित्य
  • कान्हड़दे प्रबंध को वीर रस का राजस्थानी महाकाव्य कहा जाता है।
  • राजस्थान में जन्मे प्रसिद्ध संस्कृत महाकवि - माघ
  • राजस्थानी भाषा के प्रथम उपन्यासकार, नाटककार व कहानीकार - शिवचंद भरातिया
  • संस्कृत भाषा में रचित ब्राह्मण साहित्य राजस्थान में पाया जाने वाला सबसे प्राचीन साहित्य है।

:::BEST WISHES FOR YOUR EXAMS:::
**RAJASTHAN STUDIES**

Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.

रचनाएं एवं रियासतें, जिसके बारे में जानकारी मिलती है / States and Compositions, which provides information about these


  • सुर्जन चरित्र - बूंदी
  • हम्मीर महाकाव्य - रणथंभौर
  • राजप्रशस्ति महाकाव्य - मेवाड़
  • कान्हड़दे प्रबंध - जालोर
  • खुमाण रासौ - मेवाड़
  • हम्मीर रासौ - रणथंभौर
  • सूरज प्रकाश - मारवाड़
  • नैणसी री ख्यात - मारवाड़
  • विजयपाल रासौ - करौली
  • अचलदास खींची री वचनिका - गागरोन
  • वंश भास्कर - बूंदी
  • वीर विनोद - मेवाड़
  • दयालदास री ख्यात - बीकानेर
  • मुंडिया री ख्यात (राठौड़ा री ख्यात) - मारवाड़

Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.

राजस्थानी साहित्य से संबंधित प्रमुख साहित्यकार / Important Writers Related to Literature of Rajasthan

सूर्यमल्ल मिश्रण: बूंदी जिले के हरणा गांव में चारण कुल में जन्मे सूर्यमल मिश्रण बूंदी के शासक महाराव रामसिंह हाड़ा के दरबारी कवि थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना वंश भास्कर है। जिसमें बूंदी के चौहान शासकों का इतिहास है। इनके द्वारा रचित अन्य ग्रंथ वीर सतसई, बलवंत विलास व छंद मयूख है। वीर रस के इस कवि को रसावतार कहा जाता है। सूर्यमल मिश्रण को आधुनिक राजस्थानी काव्य के नवजागरण का पुरोधा कवि माना जाता है। ये अपने अपूर्व ग्रंथ वीर सतसई के प्रथम दोहे में ही समय पल्टी सीस की उद्घोषणा के साथ ही अंग्रेजी दासता के विरूद्ध बिगुल बजाते हुए प्रतीत होते है।

एल.पी. तेस्सितोरी: इटली के प्रसिद्ध भाषा शास्त्री डाॅ. एल.पी. तेस्तितोरी 19141 में राजस्थान (बीकानेर) आए। बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने इन्हे राजस्थान के चारण साहित्य के सर्वेक्षण एवं संग्रह का कार्य सौंपा था जिसे पूर्ण कर इन्होने अपनी रिपोर्ट दी तथा राजस्थानी चारण साहित्यः एक ऐतिहासिक सर्वे तथा पश्चिमी राजस्थानी व्याकरण नामक पुस्तकें लिखी। बीकानेर इनकी कर्मस्थली रहा है। बीकानेर का प्रसिद्ध म्यूजियम इन्ही की देन है।

कर्नल जेम्स टॉड: इग्लैण्ड निवासी जेम्स टाॅड वर्ष 1917-18 में पश्चिमी राजपूत राज्यों का पाॅलिटिकल एजेंट बनकर उदयपुर आए। इन्होने 5 वर्ष तक राजस्थान की इतिहास विषयक सामग्री एकत्र की एवं इग्लैंड जाकर वर्ष 1829 में "एनल्स एंड एंटीक्विटीज आफ राजस्थान" नामक ग्रंथ लिखा जिसका दूसरा नाम सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स आॅफ इंडिया है। इस रचना में सर्वप्रथम राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ। कर्नल जेम्स टॉड  को राजस्थान के इतिहास लेखन का पितामह माना जाता है।

बांकीदास ने अपनी कविताओं में अंग्रेजी की अधीनता स्वीकार करने वाले राजपूत शासकों को फटकारा था।

कन्हैयालाल सेठिया: चुरू जिले के सुजानगढ कस्बे में जन्मे सेठिया आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिंदी व राजस्थानी लेखक है। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य रचना ‘पाथल व पीथल’ है। (पाथल राणाप्रताप को व पीथल पृथ्वीराज राठौड़ को कहा गया है) सेठिया की अन्य प्रसिद्ध रचनाएं - लीलटांस, मींझर व धरती धोरा री है।

विजयदान देथा: देखा की सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कृति ‘बांता री फुलवारी’ है जिसमें राजस्थानी लोक कथाओं का संग्रह किया गया है। राजस्थानी लोकगीतों व कथाओं के शोध में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।

कोमल कोठारी: राजस्थानी लोकगीतों व कथाओं आदि के संकलन एवं शोध हेतु समर्पित कोमल कोठारी को राजस्थानी साहित्य में किए गए कार्य हेतु नेहरू फैलोशिप प्रदान की गई। कोमल कोठारी द्वारा राजस्थान की लोक कलाओं, लोक संगीत एवं वाद्यों के संरक्षण, लुप्त हो रही कलाओं की खोज एवं उन्नयन तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने हेतु बोरूंदा में रूपायन संस्था की स्थापना की गई।

सीताराम लालस: सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के आधुनिका काल के प्रसिद्ध विद्वान रहे है। राजस्थानी साहित्य में सीताराम लालस की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि राजस्थानी शब्दकोश का निर्माण है।

मणि मधुकर: मणि मधुकर की राजस्थानी भाषा की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति पगफेरो है।

रांगेय राघव: राजस्थान के रांगेय राघ देश के प्रसिद्ध गद्य लेखक रहे है। इनके प्रसिद्ध उपन्यास घरोंदे, मुर्दों का टीला, कब तक पुकारूं, आखिरी आवाज है।

यादवेंद्र शर्मा ‘चंद्र’: राजस्थान के उपन्यासकारों में सर्वाधिक चर्चित उपन्यासकार बीकानेर के यादवेंद्र शर्मा चंद्र ने राजस्थान की सामंती पृष्ठभूमि पर अनेक सशक्त उपन्यास लिखे। उनके उपन्यास ‘खम्मा अन्नदाता’ ‘मिट्टी का कलंक’ ‘जनानी ड्योढी’ ‘एक और मुख्यमंत्री’ व ‘हजार घोड़ों का सवार’ आदि में सामंती प्रथा के पोषक राजाओं व जागीरदारों के अंतरंग के खोखलेपन, षडयंत्रों व कुंठाओं पर जमकर प्रहार किये गए है। 
राजस्थानी भाषा की पहली रंगीन फिल्म लाजराखो राणी सती की कथा चंद्र ने ही लिखी है। हिंदी भाषा में लिखने वाले राजस्थानी लेखकों में यादवेंद्रशर्मा चंद्र सबसे अग्रणी है।

चंद्रसिंह बिरकाली: ये आधुनिक राजस्थान के सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी कवि है। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रकृति परक रचनाएं लू, डाफर व बादली है। चंद्रसिं ह बिरकाली ने कालिदास के नाटकों का राजस्थानी में अनुवाद किया है।

मेघराज मुकुल सेनाणी व श्रीलाल जोशी की आभैपटकी राजस्थानी भाषा की लोकप्रिय रचनाएं रही है।


Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.


राजस्थान के इतिहास से संबंधित प्रमुख साहित्यिक कृतियां / Major Literary Work Related to the History of Rajasthan

पृथ्वीराज विजय: 12 वीं सदी में जयानक द्वारा रचित इस ऐतिहासिक ग्रंथ में प्रमुख रूप से अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के गुणों व पराक्रम का वर्णन है।

सुर्जन चरित्र: कवि चंद्रशेखर द्वारा रचित इस ग्रंथ मं बूदी रियासत के शासक राव सुर्जन हाड़ा के चरित्र का वर्णन किया गया है।

हमीर महाकाव्य: नयनचंद्र सूरी द्वारा रचित इस महाकाव्य में रणथंभौर के चैहान शासकों विशेषकर राव हमीर देव चैहान की वीरता एवं उसका अलाउद्धीन खिलजी के साथ हुए युद्ध का वर्णन है।

राजवल्लभ: महाराणा कुंभा के शिल्पी मंडन द्वारा रचित इस ग्रंथ में तात्कालिन समय की वास्तुकला व शिल्पकला का पता चलता है।

एकलिंग महात्म्य: मेवाड़ के सिसोदिया वंश की वंशावलि बताने वाले इस ग्रंथ का रचयिता मेवाड़ महाराणा कुंभा का दरबारी ‘कान्हा व्यास’ माना जाता है।

भट्टि काव्य: भट्टिकाव्य नामक इस ग्रंथ में 15वीं सदी के जैसलमेर राजा के सामाजिक व राजनीतिक जीवन का वर्णन है।

राजविनोद: भट्ट सदाशिव द्वारा बीकानेर के राव कल्याणमल के समय रचित इस ग्रंथ में 16वीं शताब्दी के बीकानेर राज्य के सामाजिक, राजनीति व आर्थिक जीवन का वर्णन मिलता है।

कर्मचंद वंशोत्कीतर्न काव्यम: जयसोम द्वारा रचित इस ग्रंथ में बीकानेर रियासत के शासकों का वर्णन है।

अमरकाव्य वंशावली: रणछोड़दास भट्ट द्वारा रचित इस ग्रंथ में मेवाड़ सिसोदिया शासकों की उपलब्धियों का वर्णन मिलता है।

कान्हड़दे प्रबंध: इस ग्रंथ के रचयिता जालौर रियासत के शासक अखैराज सोनगरा के दरबारी कवि पदमनाभ है। इसमें जालौर के वीर सोनगरा चैहान शासक कान्हड़देवे व अलाउद्धीन खिलती के मध्य हुए युद्ध का वर्णन है।

हम्मीरायण: कवि पद्मनाभ द्वारा रचित इस ग्रंथ में जालोर रियासत के शासकों का वर्णन किया गया है।
पृथ्वीराज रासौ: पिंगल में रचित इस महाकाव्य के रचयिता चंदबरदाई है। इसमें अजमेर के अंतिम चैहान शासक पृथ्वीराज तृतीय के जीवन चरित्र एवं युद्धों का वर्णन है। यह शौर्य-श्रृंगार, युद्ध प्रेम व जय-विजय का अनूठा चरित्र काव्य है।

खुमाण रासौ: दलपति विजय द्वारा रचित पिंगल भाषा के इस ग्रंथ में मेवाड़ के बप्पा रावल से लेकर महाराणा राजसिंह तक के मेवाड़ शासकों का वर्णन है।

विरूद छतहरी व किरतार बावनी: अकबर के दरबारी कवि दुरसा आढा द्वारा रचित विरूद छतहरी में महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा है।

बीकानेर रा राठौड़ा री ख्यात (दयालदास री ख्यात): बीकानेर रियासत के शासक रतनसिंह के दरबारी कवित दयालदास द्वारा रचित दो खंडों के इस ग्रंथ में जोधपुर व बीकानेर के राठौड़ शासकों के प्रारंभ से लेकर बीकानेर महाराजा सरदारसिंह तक की घटनाओं का वर्णन है।

सगत रासौ: गिरधर आसिया द्वारा रचित इस डिंगल ग्रंथ में महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्तिसिंह का वर्णन है। यह डिंगल भाषा में लिखा गया प्रमुख रासौ ग्रंथ है।

हमीर रासौ: जोधराज द्वारा रचित इस ग्रंथ में रणथंभौर के चैहान शासक राव हमीरदेव चैहान की वंशावली, अलाउद्धीन खिलती से हुए युद्ध व हमीर की वीरता का विस्तृत विवरण दिया गया है।

ढोला मारू रा दूहा: कवि कल्लोल द्वारा रचित डिंगल भाषा के श्रृंगार रस से परिपूर्ण इस ग्रंथ में गागरोन के शासक ढोला व मारवण के प्रेम प्रसंग का वर्णन है।

सूरस प्रकास: जोधपुर महाराजा अभयसिंह के दरबारी कवि करणीदान कविया द्वारा रचित इस ग्रंथ में जोधपुर के राठौड़ वंश के प्रारंभ से लेकर महाराजा अभयसिंह के समय तक की घटनाओं का वर्णन है।

मुहणौत नैणसी री ख्यात: राजस्थान के अबुल फजल के नाम से प्रसिद्ध एवं जोधपुर महाराज जसवंतसिंह प्रथम के प्रसिद्ध दरबारी (दीवान) मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ मंे राजस्थान के विभिन्न राज्यों के इतिहास (विशेषतः मारवाड़)  एवं 17 वीं शताब्दी के राजपूत मुगल संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। इसे जोधपुर का गजेटियर कहा जाता है।

मारवाड़ रा परगना री विगत: मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में मारवाड़ रियासत के इतिहास पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। मारवाड़ रा परगना री विगत को राजस्थान का गजेटियर कहा जाता है।

पदमावत महाकाव्य: मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा सन 1540 ई के लगभग रचित इस महाकाव्य में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ शासक रावल रतनसिंह के मध्य 1301 ई में हुए युद्ध का वर्णन है।

विजयपाल रासौ: विजयगढ (करौली) के यदुवंशी नरेश विजयपाल के आश्रित कवि नल्लसिंह भट्ट द्वारा रचित पिंगल भाषा के इस वीर रसात्मक ग्रंथ में विजयगढ (करौली) के शासक विजयपाल यादव की दिग्विजयों का वर्णन है।

नागर समुच्चय: यह ग्रंथ किशनगढ के शासक सांवतसिंह उर्फ नागरीदास की विभिन्न राधा-कृष्ण प्रेम विषयक रचनाओं का संग्रह है।

वेलि क्रिसन रूकमणी री: मुगल सम्राट अकबर के दरबारी नवरत्नों में से एक एवं बीकानेर महाराजा रायसिंह के छोटे भाई पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस सुप्रसिद्ध ग्रंथ में श्रीकृष्ण एवं रूकमणि के विवाह की कथा का वर्णन किया गया है। दुरसा आढा ने इस ग्रंथ को 5वां वेद एवं 19वां पुराण कहा है। यह राजस्थान में श्रृंगार रस की सर्वश्रेष्ठ रचना है। पीथल के नाम से साहित्य रचना करने वाले पृथ्वीराज राठौड़ को डाॅ. टेस्सिटोरी ने डिंगल का हैरोस कहा है।

बिहारी सतसई: जयपुर महाराज मिर्जा राजा जयसिंह के प्रसिद्ध दरबारी महाकवि बिहारीदास द्वारा ब्रजभाषा में रचित यह प्रसिद्ध ग्रंथ श्रृंगार रस की उत्कृष्ट रचना है।

बांकीदास री ख्यात: जोधपुर महाराज मानसिंह के काव्य गुरू बांकीदास द्वारा रचित यह ख्यात राजस्थान का इतिहास जानने का प्रमुख स्रोत है। इनकी एक अन्य रचना बांकीदास की बांता मंे राजपूत वंशों से संबंधित लगभग 2000 लघु कथाओं का संग्रह है।

कुवलयमाला: 8वीं शताब्दी के इस प्राकृत ग्रंथ की रचना उद्योतन सूरी ने की थी।

ब्रजनिधि ग्रंथावलि: जयपुर महाराजा प्रतापसिंह कच्छवाह द्वारा रचित काव्य ग्रंथों का संकलन। ये ब्रजनिधि के नाम से संगीत काव्य रचना करते थे।

हमीर हठ:  बूंदी के हाड़ा शासक राव सुर्जन के आश्रित कवि चंद्रशेखर द्वारा रचित है।

राजपूताने का इतिहास व प्राचीन लिपिमाला: इनके रचयिता राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार पंडित गौरीशंकर हीराशंकर ओझा है। जिन्होने हिंदी में सर्वप्रथम भारतीय लिपि का शास्त्र लेखन कर अपना नाम गिनिज बुक में दर्ज करवाया। इन्होने राजस्थान के देशी राज्यों का इतिहास भी लिखा। इनका जन्म सिरोही जिले के रोहिड़ा नामक कस्बे में हुआ।

सिरोही राज्य का इतिहास: पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा रचित

तारीख-उल-हिंद: अलबरूनी द्वारा लिखित इस ग्रंथ से 1000 ई.के आसपास की राजस्थान की सामाजिक व आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है।

तारीख-ए-अलाई (ख्जाइन उल फुतूह): अमीर खुसरों द्वारा रचित इस ग्रंथ में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ के राणा रतनसिंह के मध्य सन 1303 में हुए युद्ध व रानी पद्मिनी के जौहर का वर्णन मिलता है।

तारीख-ए-फिरोजशाही: जियाउद्धीन बरनी द्वारा लिखित इस ग्रंथ से रणथंभौर पर हुए मुस्लिम आक्रमणों की जानकारी मिलती है।

तारीख-ए-शेरशाही: अब्बास खां सरवानी द्वारा लिखित इस ग्रंथ में शेरशाह सूरी एवं मारवाड़ के शासक राव मालदेव के मध्य सन 1544 ई में हुए गिरी सुमेल के युद्ध का वर्णन किया गया है। सरवानी इस युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी था।

राठौड़ रतनसिंह महेस दासोत री वचनिका: जग्गा खिडि़या द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस ग्रंथ से जोधपुर शासक जसवंतसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना एवं मुगल सम्राट शाहजहां के विद्रेाही पुत्र औरंगजेव व मुराद की संयुक्त सेना के बीच हुए धरमत (उज्जैन) के युद्ध में राठौड़ रतनसिंह के वीरतापुर्ण युद्ध एवं बलिदान का वर्णन है।

अचलदास खींची री वचनिका: चारण कवि शिवदास गाडण द्वारा रचित इस डिंगल ग्रंथ से मांडू के सुल्तान हौशंगशाह व गागरौन के शासन अचलदास खींची के मध्य हुए युद्ध (1423ई.) तथा गागरोन के खींची शासको के बारे में संक्षिप्त जानकारी मिलती है।

बीसलदेव रासो: नरपति नाल्ह द्वारा रचित इस रासौ ग्रंथ से अजमेर के चैहान शासक बीसलदेव उर्फ विग्रहराज चतुर्थ एवं उनकी रानी (मालवा के राजा भोज की पुत्र) राजमति की प्रेमगाथा का वर्णन मिलता है।
राव जैतसी रो छंद: बीठू सूजा द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस ग्रंथ से बीकानेर पर बाबर के पुत्र कामरान द्वारा किए गए आक्रमण एवं बीकानेर के शासक राव जैतसी (जेत्रसिंह) द्वारा उसे हराये जाने का महत्वपूर्ण वर्णन मिलता हैं।

वंश भास्कर: बूंदी के हाड़ा शासक महाराव रामसिंह के दरबारी चारण कवि सूर्यमल्ल मिश्रण द्वारा 19 वीं शताब्दी में रचित इस पिंगल काव्य ग्रंथ में बूंदी राज्य का विस्तृत, ऐतिहासिक एवं उतरी भारत का इतिहास तथा राजस्थान में मराठा विरोधी भावना का उल्लेख किया गया है। वंश भास्करको पूर्ण करने का कार्य इनके दतक पुत्र मुरारीदान ने किया था।

वीरसतसई: बूंदी के शासक महाराव रामसिंह हाड़ा के प्रसिद्ध दरबारी कवि सूर्यमल मिश्रण द्वारा रचित इस ग्रंथ से बूंदी के हाड़ा शासकों के इतिहास, उनकी उपलब्धियों व अंग्रेज विरेाधी भावना की जानकारी मिलती है। सूर्यमल मिश्रण की अन्य रचनाएं - बलवंत विलास, छंद मयूख, उम्मेदसिंह चरित्र व बुद्धसिंह चरित्र है।

चेतावनी रा चूंगट्या: राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर केसरीसिंह बारहट ने इन दोहों के माध्यम से मेवाड़ा महाराणा फतेहसिंह को वर्ष 1903 के लाॅर्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से रोका था।

वीर विनोद: मेवाड़ महाराणा सज्जनसिंह (शंभूसिंह) के दरबारी कविराज श्यामलदास ने अपने इस विशाल ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना महाराणा सज्जनसिंह के आदेश पर प्रारंभ की। चार खंडों में रचित इस ग्रंथ पर कविराज श्यामलदास का ब्रिटिश सरकार द्वारा केसर-ए-हिंद की उपाधि प्रदान की गई। इस ग्रंथ में मेवाड़ के विस्तृत इतिहास सहित अन्य संबंधित रियासतों का भी वर्णन है। मेवाड़ महाराणा सज्जनसिंह ने श्यामलदास को कविराज व महामहोपाध्याय की उपाधि से विभूषित किया था।

ढोला मारवणी री चैपाई (चड़पही): इस ग्रंथ की रचना कवि हरराज द्वारा जैसलमेर के यादवी वंशी शासकों के मनोरंजन के लिए की गई।

बातां री फुलवारी: आधुनिक काल के प्रसिद्ध राजस्थानी कथा साहित्यकार विजयदान देथा द्वारा रचित इस रचना में राजस्थानी लोक कलाओं का संग्रह किया गया।

राव सुर्जन हाड़ा के आश्रित कवि चंद्रशेखर की दो प्रसिद्ध कृतियां - सुर्जन चरित व हमीर हठ


Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.


Literature of Rajasthan

राजस्थानी साहित्य: काल विभाजन, चारण साहित्य, जैन साहित्य, ब्राह्मण साहित्य & संत साहित्य 

राजस्थानी साहित्य का काल विभाजन

  • आदिकाल - वि.सं. 800 - 1460
  • मध्यकाल- वि.सं. 1460-1900
  • आधुनिक काल- वि.सं. 1900 से....वर्तमान

राजस्थान के प्राचीन साहित्य को प्रमुख रूप से 4 भागों में बांटा गया है 

  1. चारण साहित्य (Charani Literature)
  2. जैन साहित्य (Jain's Literature)
  3. ब्राह्मण साहित्य (Brahmin Literature)*
  4. संत साहित्य (Saints' Literature)
*संस्कृत भाषा में रचित ब्राह्मण साहित्य राजस्थान में पाया जाने वाला सबसे प्राचीन साहित्य है।


चारण साहित्य की प्रमुख रचनाएं (Charani Literatuure)

  • चंदवरदाई का ‘पृथ्वीराज रासौ’ ('Prithvi Raj Raso' by Chandvardai)
  • पृथ्वीराज राठौड़ का  ‘वेलि क्रिसन रूक्मणी री’ ('Veli Kishan Rukmani Ri' by Prithvi Raj Rathore)
  • शिवदास गाडण (चारण) की ‘अचलदास खींची री वचनिका’ ('Achaldas Khnichi Ri Vachnika' by Shiv Das Gadav (Charan))
  • सूर्य मिश्रण का ‘वंशभास्कर‘ व ‘वीर सतसई’ ('Vansh Bhaskar' and 'Vir Satsai' by Surya Mal Mishran)
  • करणीदान का ‘सूरज प्रकाश’ ('Suraj Prakash' by Karni Dan)
  • दयालदास खींची री वचनिका (Dayaldas Khnichi Ri Vachnika)
  • गिरधर आसिया का ‘सगत रासो’ ('Sagat Raso' by Girdhar Asiya)
  • कवि कलोल का ‘ढोला मारू रा दूहा’ ('Dhola Maru Ra Duha' by Kavi Kalol)
  • मुहणोत ‘नैणसी री ख्यात’ व ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ ('Nainsi Ri Khyat' and 'Marwar Paragna Ri Vigat' by Muhnot Nainsi )
  • बांकीदास री ख्यात (Bankidas Ri Khyat)
  • जग्गा खिडि़या की ‘राठौड़ रतनसिंह महेस दासोत री वचनिका’ ('Rathore Ratan Singh Mahes Dasot Ri Vachnika' by Jagga Khadiya)
  • बीठू सूजा द्वारा रचित ‘राव जैतसी रो छंद’ ('Rav Jaitsi Ro Chand' by Beethu Suja)
  • ढोला मारवणी री चैपाई (Dhola Marwari Ri Choupai)

संस्कृत साहित्य की प्रमुख कृतियां (Sanskrit Literature)


  • चंद्रशेखर का ‘सुर्जन चरित्र’ ('Surjan Charitra' by Chandrashekhar)
  • नयनचंद्र सूरी का ‘हमीर महाकाव्य’ ('Hamir Mahakavya' by Nayan Chandra Suri)
  • मंडन का ‘राजवल्लभ’ ('Rajvallabh' by Mandan)
  • जयानक का ‘पृथ्वीराज विजय’ ('Prithviraj Vijaya' by Jayanak)
  • जयसोम का ‘कर्मचंद वंशोत्कीर्तन काव्यम’ ('Karmchand Vanshotkirrtan Kavyam' by JayaSom)
  • रणछोड़दास भट्ट का ‘अमरकाव्य वंशावली’ ('Amar Kavya Vanshavali' by Ranchhor Das Bhatt)
  • उद्योतन सूरी का ‘कुवलमाला’ ('Kuvlayamala' by Udyyotan Suri)
  • पदमनाभ का ‘कान्हड़दे प्रबंध’ व ‘हमीरायण’ ('Kanhad De Prabandh' and 'Hamirayan' by Padmanabh)
  • नरपतिनाल्ह का ‘वीसलदेव रासौ’ ('Visal Dev raso' by Narpati Nalh)
  • महाकवि माघ का ‘शिशुपाल वध’ ('Shishupal Vadh' by Mahakavi Magh)
  • राणा कुंभा के दरबारी कान्ह व्यास का  ‘एकलिंग महात्म्य’ ('Ekling Mahatamya' by Kanha Vyas)
  • मेरूतुंग का ‘प्रबंध चिंतामणि’ ('Prabandh Chintamani' by Merutung)
  • भट्ट सदाशिव का ‘राजविनोद’ (Raj Vinod' by Bhakta Sada Shiv)

Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.

राजस्थानी साहित्य से संबंधित प्रमुख शब्दावली / Key Terminology Related to Literature of Rajasthan


  • ख्यात (Khyat): राजस्थानी साहित्य के इतिहासपरक ग्रंथ जिनकी रचना तत्कालीन शासकों ने अपनी मान मर्यादा एवं वंशावली के चित्रण हेतु करवाई हो, ख्यात कहलाती है।
  • वंशावली (Vanshavali / Pedigree): राजवंशों की वंशावलियां विस्तृत विवरण सहित।
  • वात (Baat): वात का अर्थ ऐतिहासिक, पौराणिक, प्रेमपरक व काल्पनिक कथा या कहानी से है।
  • प्रकास (Prakas): किसी वंश या व्यक्ति विशेष की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने वाली कृतियां।
  • वचनिका (Vachnika / Bachnika): यह गद्य-पद्य तुकांत रचना होती है।
  • मरस्या (Marasya / Anthologies): राजा या किसी व्यक्ति विशेष की मृत्यु के बाद शोक व्यक्त करने के लिए रचित काव्य।
  • दवावैत (Davavait): यह उर्दू फारसी की शब्दावली से युक्त राजस्थानी कलात्मक लेखन शैली है।
  • रासौ (Raso / Rasau): राजाओं की प्रशंसा में लिखे गये विशाल काव्य ग्रंथ।
  • वेलि (Veli): राजस्थानी वेलि साहित्य में शासकों व सामंतों की वीरता, इतिहास, उदारता व वंशावली का उल्लेख होता है।
  • विगत (Vigat): इतिहास परक रचनाएं।
  • निसाणी (Nisani): किसी व्यक्ति या घटना का स्मरण दिलाने वाली रचना।
  • ख्यात-वात-वित-वंशावलि - गद्य रूप में; निसाणी-गीत-रासौ-वेलि - पद्य रूप में।


Visit these blogs for more innovative content for 
All Competitive Examinations

(Content on Geography, History, Polity, Economy, Biology, Physics, Chemistry Science & Technology, General English, Computer etc. for Examinations held by UPSC - CSAT, CDS, NDA, AC; RPSC And Other  State Public Service Commissions, IBPS - Clercial & PO, SBI, RRB, SSC - HSL, CGL etc.)

(Special Content for RAS 2013 Prelims & Mains)

(Learn through Maps, Diagrams & Flowcharts)

Regards,
RAJASTHAN STUDIES
Blog on Rajasthan General Knowledge (GK)  for all Competitive Examinations Conducted by Rajasthan Public Service Commission (RPSC) and other Governing Bodies.

Rajasthan GK Fact Set 06 - "Geographical Location and Extent of the Districts of Rajasthan" (राजस्थान के जिलों की भौगोलिक अवस्थिति एवं विस्तार)

Its sixth blog post with new title and topic- "Geographical Location and Extent of the Districts of Rajasthan" (राजस्थान के ...